वैज्ञानिकों ने दुनिया का सबसे छोटा कंप्यूटर विकसित किया है जो सिर्फ 0.3 मिलीमीटर का है। यह कैंसर का पता लगाने और उसके इलाज के नए दरवाजे खोलने में मदद कर सकता है। इससे पहले वाली सिस्टम 2 गुना 2 गुना 4 मिलीमीटर मिशिगन माइक्रो मोट सहित अन्य कंप्यूटर तब भी अपनी प्रोग्रामिंग और डेटा को सुरक्षित रख सकता है जब वह आंतरिक रूप से चार्ज न हो।
किसी एक डेस्कटॉप के चार्जर के प्लग को निकालें तो उसके डाटा और प्रोग्राम तब भी उपलब्ध रहते हैं जब बिजली आते ही वह खुद को बुट कर ले। हालांकि इन नए सुक्ष्म डिवाइस में यह सुविधा उपलब्ध नहीं है। ये छोटे कंप्यूटर जैसे ही डिसचार्ज होंगे इनकी प्रोग्रामिंग और डाटा समाप्त हो जाएंगे। ने कहा , ‘हम यह सुनिश्चित नहीं कर पाए हैं कि इन्हें कंप्यूटर कहा जाना चाहिए या नहीं। यह एक राय वाली बात है कि इनमें कंप्यूटर की तरह न्यूनतम फंक्शन वाली चीजें हैं या नहीं।

’इस कंप्यूटर से कई तरह के काम लिए जा सकते हैं और इसका इस्तेमाल कई उद्देश्यों के लिए किया जा सकता है।
इसे बनाने वाली टीम ने इसका इस्तेमाल तापमान मापदंड के स्पष्टता के लिए करने तय किया। कुछ अध्ययनों से पता चला है कि सामान्य उत्तक से ट्यूमर ज्यादा गर्म होते हैं। इस बात को साबित करने के लिए पर्याप्त आंकड़े उपलब्ध नहीं थे। तापमान से कैंसर के इलाज का पता लगाने में भी मदद मिल सकता है।

(सन्मार्ग रांची से साभार)