-दी राईटर

दक्षिण अफ्रीका में रंगभेद की नीति को खत्म करने वाले नेल्सन मंडेला का अपने देश में वही स्थान है जैसाकि भारत में महात्मा गांधी का है। इनका पूरा नाम नेल्सन रोहिल्हाला मंडेला है। देश में हो रहे अश्वेतों के प्रति भेदभाव को देखते हुए नेल्सन मंडेला ने अहिंसा का मार्ग अपनाया, वे महात्मा गांधी और अब्राहम लिंकन को प्रेरणा स्त्रोत मानते थे और उन्ही के बताये अहिंसा के मार्ग पर चलकर उन्होंने देश में रंग के आधार पर हो रहे भेदभाव को समाप्त किया और दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति बने।


बीसवीं सदी में इस राष्ट्रनायक ने भी प्रमुख किरदार निभाया। एक तरह से सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक परिवर्तनों की बागडोर इस महारथी के हाथ में रही। राजतंत्र, उपनिवेशवाद और लोकतंत्र के संधिकाल वाली इस सदी में अपने देश का परचम थामे इस राजनेता ने विश्व इतिहास की इबारत अपने हाथों से लिखी। हम बात कर रहे हैं दक्षिण अफ्रीकी गांधी नेल्सन मंडेला की, जो अब हमारे बीच नहीं हैं। मंडेला ने अपने देश को एक राष्ट्र के रूप में विश्व के मानचित्र पर स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने दक्षिण अफ्रीका में रहने वाले गोरों को समझाया कि वे देश में अल्पसंख्यक हैं इसलिए सत्ता की बागडोर बहुसंख्यक अश्वेतों के हाथों में होना चाहिए। उनकी श्वेतों के साथ बातचीत ने सत्ता के हस्तांतरण का मार्ग प्रशस्त किया और इसके लिए अफ्रीकन नेशनल कांग्रेस को तैयार किया। उन्होंने लगभग एक रक्तहीन क्रांति कर अफ्रीकी लोगों को उनका हक दिलाया और इस परिवर्तन के दौरान हिंसा नहीं हुई क्योंकि वे बातचीत से समस्याएं हल करने में विश्वास करते थे। मंडेला का 5 दिसंबर, 2013 को निधन हो गया।


1941 में जीवनयापन के लिए मंडेला एक कानूनी फार्म में क्लर्क बन गये, लेकिन वे धीरे-धीरे राजनीति की तरफ बढ़ने लगे। और इसी बीच उन्होंने रंग े(गोरे-काले लोग) पर हो रहे भेदभाव को दूर करने के लिए राजनीति में पहला कदम रखा। जिसके बाद राजनीति में उनकी लोकप्रियता और भी बढ़ने लगी।


1944 में वे अफ्रीकन नेशनल कांग्रेस में शामिल हुये जिसमे रंगभेद के विरुद्ध आन्दोलन जारी था.. जब उन्होंने अपना हाथ राजनीति में अजमाया तो लोग उनकी बातों पर गौर करने लगे जिसके बाद राजनीति को समझते हुए उन्होंने अपने मित्रों और अपने सहयोगियों के साथ मिलकर 1947 में अफ्रीकन नेशनल कांग्रेस यूथ लीग की स्थापना की और उस लीग का उन्हें सचिव चुना गया।


राजनीति में आने के बाद उन्होंने बहुत से विरुद्ध आन्दोलन चलाये जिनके कारण उन पर और उनके कुछ दोस्तों पर देशद्रोह का मुकदमा चलाया गया, लेकिन उनके पक्ष में अधिक लोग होने के कारण उन्हें निर्दोष माना गया और उनके द्वारा चलाये विरुद्ध आंदोलनों को भी सही माना गया। उनके पास बहुत ही अधिक लोगों का समर्थन था।
5 अगस्त 1962 को उहोने मजदूरों के लिए आन्दोलन शुरू किया, और उस आन्दोलन में बहुत से मजदूर हड़ताल पर उतरे जिससे देश में व्यापारी लोगों को बहुत नुक्सान हुआ और कई राजनेताओं को यह पसंद नहीं आया, उसी आन्दोलन के चलते वे देश से बाहर गए हुए थे, उनके वापस लौटते ही मजदूरों को हड़ताल के लिए उकसाने और बिना अनुमति देश छोड़ने के आरोप में गिरफ्तार किया गया, उन पर बहुत समय तक मुकदमा चला और 12 जुलाई 1964 को उन्हें उम्रकैद की सजा सुनाई गयी..


सजा के लिए उन्हें रोबेन द्वीप की जेल भेजा गया, लेकिन जेल पहुचने पर भी उनका राजनीति के प्रति उत्साह खत्म नहीं हुआ. उहोने जेल में 27 बर्ष बिताये और 11 फरवरी 1990 को उन्हें रिहाई मिल गई। रिहाई के बाद उन्होंने समझौते और शान्ति की निति द्वारा एक लोकतान्त्रिक एवं बहुजातीय अफ्रीका की नींव राखी।
1994 में दक्षिण अफ्रीका में रंगभेद रहित चुनाव हुए. और अफ्रीकन नेशनल कांग्रेस ने 62 प्रतिशत मत प्राप्त किये और अधिक बहुमत के साथ अफ्रीकन नेशनल कांग्रेस की सरकार बनी। 10 मई 1944 को मंडेला अपने देश के सर्वप्रथम अश्वेत राष्ट्रपति के रूप में चुने गये।. 1996 में संसद की और से नए संविधान की सहमती मिली। और कई जाँच संस्थओं की स्थापना की गई। नेल्सन मंडेला ने 1999 में कांग्रेस अध्यक्ष का पद छोड़ दिया।

मंडेला ने तीन शादियाँ की थी, 1944 को उन्होंने अपने मित्र वोल्टर सिसुलू की बहन इवलिन मेस से शादी की, 1961 में जब मंडेला पर देशद्रोह का मुकदमा चल रहा था और जिसमे वे निर्दोष पाए गए, उसके मकदमे के दौरान उनकी मुलाकत एक औरत से होती है जो बाद में उनके दूसरी पत्नी”नोमजामो विनी मेडिकिजाला” बनी. 1998 में अपने 80वें जन्मदिवस पर उन्होंने ग्रेस मेकल से शादी की।
5 दिसम्बर 2013 को वे जोहान्सबर्ग में अपने घर पर थे तभी उनके फेफड़ों में संक्रमण होने के कारण उनकी मृत्यु हो गई। उस समय उनकी उम्र 95 वर्ष थी, और उनकी मृत्यु की घोषणा राष्ट्रपति जेकब जूमा ने की।

सम्मान व पुरस्कार

दक्षिण अफ्रीका के लोग मंडेला को व्यापक रूप से राष्ट्रपिता मानते थे। उन्हें लोकतंत्र के प्रथम संस्थापक, राष्ट्रीय मुक्तिदाता और उद्धारकर्ता के रूप में देखा जाता था। 2004 में जोहन्सबर्ग में स्थित सैंडटन रक्वायर शॉपिंग सेंटर में मंडेला की मूर्ती स्थापित की गई और सेंटर का नाम बदलकर नेल्सन मंडेला रक्वायर रख दिया गया. दक्षिण अफ्रीका में उन्हें मदीबा कह कर बुलाया जाता है, जो बुजुर्गों के लिए एक सम्मान-सूचक शब्द है।
नवम्बर 2009 में संयुक्त राष्ट्र महासभा ने रंगभेद विरोधी संघर्ष में उनके योगदान के सम्मान में उनके जन्मदिवस(18 जुलाई) को मंडेला दिवस घोषित किया. 67 वर्षों तक मंडेला के इस आन्दोलन से जुड़े होने के उपलक्ष्य में लोगों ने दिन के 24 घण्टों में से 67 मिनट दूसरों की मदद करने में दान देने का आग्रह किया। मंडेला को विश्व के विभिन्न देशों और संस्थाओं द्वारा 250 से भी अधिक सम्मान और पुरस्कार प्रदान किये गए।

 

विचार

  • शिक्षा सबसे शक्तिशाली हथियार है जिससे आप दुनिया को बदल सकते है।
  • मैं जातिवाद से बहुत नफरत करता हूँ, मुझे यह बर्बरता लगती है. फिर चाहे वह अश्वेत व्यक्ति से आ रही हो या श्वेत व्यक्ति से।
  • विशेष रूप से जब आप जीत का जश्न मनाते हो और जब कभी अच्छी बातें होती है, तब आपको दूसरों को आगे रखकर पीछे से नेतृत्व करना चाहिए और जब भी खतरा हो आपको आगे की लाइन में आना चाहिये. तब लोग आपके नेतृत्व की सराहना करेंगे।
  • मेरे देश में लोग पहले जेल जाते हैं और फिर राष्ट्रपति बन जाते हैं।
  • अगर आप एक आदमी से उस भाषा में बात करते हैं जिसे वह समझता है, तो वह उसके दिमाग में जाती है. वही अगर आप उसकी अपनी भाषा में बात करते हैं तो वह उसके दिल में उतरती है।
  • मैंने यही सीखा कि साहस डर का अभाव नहीं था, बल्कि इस पर विजय थी. बहादुर आदमी वह नहीं है जो डर को महसूस नहीं करता है, बल्कि वह है, जो उस डर को भी जीत ले.
  • क्या कभी किसी ने सोचा है कि वे जो चाहता था वो उन्हें इसलिए नहीं मिला क्योंकि उनके पास प्रतिभा नहीं थी, शक्ति नहीं थी या धीरज नही था, प्रतिबद्धता नहीं थी ।
  • भले ही आपको कोई बीमारी हो तो तब आप बैठकर मूर्ख की तरह उदास मत हो जाओ. जीवन का भरपूर आनंद लें और आपको जो बीमारी लगी है उसे चुनौती दें।
  • लोगों को उनके मानव अधिकारों से वंचित रखना, उनकी असल मानवता को चुनौती देना है।
  • छोटा काम करना या छोटी सोच वालो के साथरहने से कोई फायदा नहीं है। आप जिस तरह का जीवन व्यतीत कर सकते है , उससे कम स्तर की जिन्दगी जीना गलत है।
  • हम बुद्धिमानी से समय का उपयोग करें और हमेशा पता होना चाहिए कि समय हमेशा सही काम करने के लिए तैयार है।
  • बुद्धिमानी इसमें होगी कि लोगों को चीजें करने के लिए मनालें और उनको लगे कि ये उन्होंने अपने विचार से किया है।
  • एक अच्छा नेता स्पष्ट रूप से और अच्छी तरह से एक बहस में शामिल होता है क्योंकि वो जानता है कि अंत में वह और दूसरा पक्ष करीब होंगे और इस तरह मजबूती से उभरता हैं। आपको ऐसा विचार नहीं आएगा जब तक आप अभिमानी, सतही और बेख़बर हैं।
  • जब कभी अच्छी बातें होती है, विशेष रूप से जब आप जीत का जश्न मनाते हो, तब आपके लिए दूसरों को आगे रखकर पीछे से नेतृत्व करना बेहतर होगा। जब भी खतरा हो आपको आगे की लाईन में आना चाहिए। तब लोग आपके नेतृत्व की सराहना करेंगे।
  • ऐसी कोई चीज नहीं है, जो स्वतंत्रता का हिस्सा बन सके।