मेघा
एक समय था जब योग गुरु रामदेव के करीबी और व्यापारिक सहयोगी बालकृष्ण सीबीआई से भागे फिर रहे थे । और आज, उनका नाम भारत के १९ अमीर व्यक्तियों में शामिल है। बालकृष्ण रामदेव के व्यापारिक प्रतिष्ठान पतंजलि आयुर्वेद लिमिटेड, जो आज देश के नामी-गिरामी संस्थानों में सुमार है, उसके चीफ एग्जीक्यूटिव अफसर हैं।
हालाँकि, योगगुरु रामदेव ने योग को घर-घर में प्रसारित करने में अग्रणी भूमिका निभाई और उसी के मदद से अपनी कंपनी के सामानों को भी जन-जन तक आसानी से पहुँचाया। ये अलग बात है कि बाबा रामदेव और उनके शिष्य बालकृष्ण देश के विभिन्न जांच एजेंसियों के सामने बार-बार उपस्थित हो कर कभी  नकली दस्तावेज़ों तो कभी किसी अन्य मामले में सीबीआई और ईडी के सवालो का जवाब देना पड़ा।
लोगों का मानना है की बाबा रामदेव की पतंजली आयुर्वेद लिमिटेड, जो अब 10,500 करोड़ रुपये की कंपनी बन चुकी है, और उनके सहयोगी बालकृष्ण का व्यक्तित्यव तरह-तरह के विवादों में घिरा रहा है। रामदेव को विदेश में उपहार स्वरुप द्वीप मिलने के मामले में भी सरकार को जवाब देना पड़ा, वहीँ उनके  द्वारा उत्पादित सामान की गुणवत्ता अक्सरहां प्रश्नचिन्ह उठता रहा है।
हाल ही में, योग गुरु ने पतंजलि आयुर्वेद लिमिटेड को एक गैर-लाभकारी संगठन बनाने की अपनी योजना की घोषणा कर पुरे व्यापारिक समुदाय और जन-मानस को झकझोर दिया। किसी भी संगठन के चरित्र को बदलने में कुछ भी गलत नहीं है, लेकिन पटना हाईकोर्ट के प्रतिष्ठित वकील सुनील पाठक का मानना ​​था कि यह सरकार को भारी कर का भुगतान करने और व्यापारिक संस्था के लिए अधिक कर-मुक्त राजस्व अर्जित करने के लिए एक नई सुनियोजित साजिस हो सकती है।
पतंजलि आयुर्वेद को गैर लाभकारी संगठन के रूप में बदलने की शुरुआत में रामदेव ने धर्मार्थ से जुड़े संस्था, पतंजली सेवा ट्रस्ट, जो पतंजली समूह का हिस्सा हैं, की स्थापना की घोषणा की है। वकीलों का कहना है कि आयकर अधिनियम के तहत धर्मार्थ ट्रस्ट को व्यवसाय करने में कोई प्रतिबंधित है और धर्मार्थ ट्रस्ट द्वारा किए गए व्यवसायों से उत्पन्न आय भी कर छूट के लिए अर्हता प्राप्त कर सकती है, बशर्ते कुछ शर्तों को पूरा किया गया है।
१९ अक्तूबर, २०१७ को केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) ने 2017 के वित्त अधिनियम के तहत लाए गए आय कर अधिनियम में हुए परिवर्तनों के अनुसार, धार्मिक और धर्मार्थ ट्रस्टों के पंजीकरण से संबंधित नियमों में संशोधन को जारी किया।
विगत कुछ सालों में पतंजलि के उत्पादों स्थानीय स्तर बेचने के लिए बड़े-बड़े व्यापारियों में इस कंपनी के डीलरशिप लेने के लिए होड़ लग गयी थी। कारण है की इसके द्वारा उत्पादित सामान, जिसमे कॉस्मेटिक्स से लेकर रसोई के सामानों तक के उत्पाद शामिल हैं, पर भरी कर छूट है।
यह अलग बात है कि उपभोक्ताओं द्वारा पतंजलि उत्पादों की गुणवत्ता पर सवाल उठता रहा है। केंद्र सरकार, राज्य सरकार तथा अन्य संस्थाओं के प्रयोगशालाओं द्वारा परीक्षण किए जाने पर पतंजलि के कई उत्पादों को निम्न स्तर के गुणवत्ता वाला पाया गया है । खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) के गुणवत्ता वाले पैरामीटर्स में बहुत सारे खाने वाले पदार्थ भी विफल हुए हैं।

हाल में नेपाल ने भी पतंजलि को उत्पादों के गुणवत्ता पर सवाल उठाते हुए उसके उत्पादों का माइक्रोबियल टेस्ट कराया जिसमें उसके छः आयुर्वेदिक उत्पाद विफल रहे। पतंजली के दो उत्पाद – दिव्या अमला रस और शिवलिंगी बीज – हरिद्वार के आयुर्वेद और यूनानी कार्यालय द्वारा घटिया गुणवत्ता वाले पाए गए थे।
कैन्टीन स्टोर डिपार्टमेंट (सीएसडी), जो सशस्त्र बलों के ग्रोसरी दुकानों उपभोक्ता उत्पादों की आपूर्ति करता है, ने अप्रैल में पतंजलि के आमला के रस की बिक्री को निलंबित कर दिया था. सीएसडी के प्रयोगशाला परीक्षण में पतंजलि ब्रांड का आमला के रस गुणवत्ता जांच में विफल रहा था। रिपोर्टों का कहना है कि कई पतंजली उत्पादों को उपभोक्ताओं और खुदरा विक्रेताओं से प्रतिकूल प्रतिक्रिया प्राप्त करना शुरू कर दिया गया है।
पतंजलि आयुर्वेद पर गलत ब्रैंडिंग का आरोप है और हरिद्वार के एक स्थानीय अदालत ने अपने उत्पादों के “गलत ब्रांडिंग और गुमराह करने वाले विज्ञापन” के लिए 11 लाख रुपए का जुर्माना भी लगाया है। पतंजलि आर्युवेद को आटा नूडल्स के निर्माण में खाद्य सुरक्षा मानदंडों के उल्लंघन के कारण दो साल पहले नोटिस भी जारी किया गया था।
बाबा रामदेव, जो अपने उत्पादों को ‘देसी कलेवर’ देकर उसके लिए एक बड़ा बाजार बनाया, विवादों के घिरे रहे हैं। उनके गुरु स्वामी शंकर देव के लापता होने के सिलसिले में सीबीआई उनसे कई बार पूछताछ कर चुकी है. गुरु स्वामी शंकर देव रहस्यमय तरीके से गायब हो गए थे।
सीबीआई के सूत्रों के मुताबिक रामदेव को कुछ घंटों तक पूछताछ की गई और उन्हें फिर से पूछताछ की जा सकती है। योग उद्यमी और यूपीए सरकार के बीच तनावपूर्ण संबंधों के कारण इस मामले ने राजनीतिक आयाम ग्रहण किया है।
पिछले साल जून में हरियाणा के रोहतक में एक स्थानीय अदालत ने रामदेव के खिलाफ गैर-जमानती गिरफ्तारी वारंट जारी किया था, जिसमें उन्होंने अपनी टिप्पणी के लिए लाखों लोगों को ‘भारत माता की जय’ का उद्घोष नहीं करने पर उनके सर कलम करने की बात की थी।
बालकृष्ण को 2012 में सीबीआई ने गिरफ्तार किया था, जब एक कथित फर्जी दस्तावेजों के मामले में एक विशेष अदालत ने उनके खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी किया था। बताया गया था की बालकृष्ण ने भारतीय पासपोर्ट बनवाने के लिए फर्जी और जाली दस्तावेजों का सहर लिया था।
सीबीआई ने आरोप लगाया है कि बालकृष्ण, संस्कृत महाविदयाल के तत्कालीन प्रधान सचिव के साथ, उत्तर प्रदेश के खुर्जा ने पूर्व नकली शैक्षिक प्रमाणपत्र जारी करने की साजिश रची थी, जिसमें वजह से उन्हें पासपोर्ट बनवाया था।