नयी दिल्ली,  जुलाई (वार्ता) उच्चतम न्यायालय ने मणिपुर फर्जी मुठभेड़ मामले में आराेपियों की अब तक गिरफ्तारी न किये जाने को लेकर आज व्यक्तिगत तौर पर पेश केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) के निदेशक आलोक वर्मा को आड़े हाथों लिया।
श्री वर्मा इस मामले की सुनवाई के दौरान अदालत कक्ष में व्यक्तिगत तौर पर उपस्थित थे।
न्यायमूर्ति मदन बी. लोकुर की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने श्री वर्मा से पूछा कि क्या अभी तक सीबीआई ने कोई गिरफ्तारी की है? इस पर उन्होंने कहा कि अभी तक कोई गिरफ्तारी नहीं हुई, अलबत्ता कुछ लोगों से पूछताछ जरूर हुई है। उन्होंने कहा कि मामला बहुत ही पुराना हो चुका है और परिस्थितिजन्य साक्ष्य के अलावा इसमें कोई दस्तावेजी साक्ष्य नहीं मिले हैं। शीर्ष अदालत ने कहा कि इसका मतलब यह हुआ कि हत्यारे मणिपुर में खुलेआम घूम रहे हैं।
न्यायमूर्ति लोकुर ने कहा, “आपके आरोप पत्र के मुताबिक ये आरोपी हत्यारे हैं, पर इसके बावजूद ये इम्फाल की गलियों में बेपरवाह घूम रहे हैं।” मौके को भांपते हुए सीबीआई निदेशक ने कहा कि वह जल्द इस पर फैसला लेंगे। सीबीआई की तफ्तीश पर सवाल उठाने के बाद हालांकि न्यायालय ने कहा कि गिरफ्तारी का काम वह जांच एजेंसी के विवेक पर छोड़ते हैं।
गौरतलब है कि पिछ्ली सुनवाई के दौरान न्यायालय ने सीबीआई निदेशक को समन जारी कर आज अदालत में व्यक्तिगत तौर पर पेश होने का निर्देश दिया था। न्यायालय ने सीबीआई जांच की धीमी प्रक्रिया पर भी नाराजगी जतायी थी।
न्यायालय एक याचिका की सुनवाई कर रहा है, जिसमें उग्रवाद प्रभावित मणिपुर में 1528 हत्याओं पर सवाल उठाये गये थे।