इटावा, 08 अगस्त (वार्ता) उत्तर प्रदेश में इटावा से मैनपुरी के बीच करीब एक साल पहले शुरू हुआ यात्री रेल संचालन रेलवे की लिये फिलहाल घाटे का सौदा साबित हो रहा है।
समाजवादी पार्टी (सपा) संस्थापक मुलायम सिंह यादव के अथक प्रयासों के बाद रेलवे ने दिसम्बर 2016 से इस रेलमार्ग पर पैसेंजर ट्रेन का संचालन शुरू किया था मगर रेलवे के लिये यह ‘आमदनी अठन्नी खर्चा रूपया’ वाली कहावत को चरितार्थ कर रहा है वहीं मौजूदा समय सारिणी के कारण जनता को भी इसका लाभ नहीं मिल रहा है ।

इटावा जंक्शन के अधीक्षक पूरन मल मीणा ने बुधवार को ‘यूनीवार्ता’ से कहा कि कई मर्तबा ट्रेनों में अभियान चलाया गया। इस दौरान दर्जनों लोग बिना टिकट पकड़े गए । इसके बावजूद लोगा टिकट नहीं खरीदते है। ट्रेन के संचालन में 900 लीटर डीजल खर्च आता है । कमाई कुछ नहीं होती इसकी रिपोर्ट भेज दी गई है शुरुआत में इटावा से मैनपुरी के यात्रियों की संख्या अच्छी थी। धीरे-धीरे यात्रियों की संख्या कम हो गई पहले जो टिकट खरीदें जाते थे अब वह भी टिकट नहीं खरीद रहे हैं । 55 किलोमीटर के सफर के लिये रेलवे ने मात्र 15 रुपए की किराया रखा गया है ।

मुख्य टिकट पयर्वेक्षक जगदीश प्रसाद बताते हैं कि रोजाना छह या सात टिकट ही बिकते हैं । इससे रेल विभाग को खासा घाटा उठाना पड रहा है । 55 किलोमीटर तक जाने के लिए यात्रियों से 15 लिए जाते हैं । एक अगस्त को जहां पांच टिकटों की बिक्री हुयी वहीं दो अगस्त को 7, तीन अगस्त को 6, चार अगस्त को 5, पांच अगस्त को 6, छह अगस्त को 7 और सात अगस्त को मात्र पांच रेल यात्रियों ने टिकट खरीदा है ।